ग्वालियर घरांना


– ग्वालियर घरांना –

आधुनिक संगीत जगत मे ख्याल गायकी के अनेक घराने प्रचलित है। किंतु याहा पर कूछ प्रमुख घरानो का उल्लेख किया जाता है

 

– ग्वालियर घरांना –

ग्वालियर घराने के प्रवर्तक नत्थन पीर बक्श माने जाते है। ये ख्याल गायकी के प्रसिद्ध कलाकार माने जाते थे। इनको दो लडके थे एक का नाम कादिर बख्श और दुसरे का नाम पीर बख्श था। इनके दोनो पुत्र संगीत कला के संस्कार से संपन्न थे। फल यह हूआ कि ये दोनो उच्च कोटी के संगीतज्ञ हुये।

कादिर बख्श कि कला से प्रभावित होकर ग्वालियर के राजा ने उन्हे अपने राजाश्रय मे रखा और उनको स्थायी आर्थिक सहायता प्रदान की। पीर बख्श कि नियुक्ती ग्वालियर के दुसरे राजा जनकोजी के दरबार मे हुई. ग्वालियर राज्य मे ये दोनो कलाकार अत्यंत सन्मानित हुये। कादिर बख्श के तीन लडके उत्पन्न हुये। उनके नाम है हस्सु खां, नत्थू खां और हद्दू खां। पीर बख्श कि कोई संतान नहि थी, इसलिये उन्होने नत्थू खां को गोद ले लिया। हस्सु खां के लडके का नाम गुले इमांम खां था। गुले इमांम खां के लडके का नाम मेहंदी हुसेन खां था।

हद्दू खां के दो लाडके थे। एक का नाम रहमत खां और दुसरे का नाम था मोहम्मद खां। नत्थू खां कि कोई संतान नहि थी। उनके एक परम मित्र थे। उनके लडके निसार हुसेन को गोद ले लिया।

हस्सु खां के शिष्य परंपरा मे बाबा दीक्षित, वासुदेव जोशी, बाल कृष्ण बुआ तथा  बाल कृष्ण बुआ कि शिष्य परंपरा मे पं.विष्णू दिगंबर पलुस्कर और उनकी शिष्य परंपरा मे पं.ओंकार नाथ ठाकूर, विनायक राव पटवर्धन तथा नारायण राव व्यास आदी के नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय है। हद्दू खां कि शिष्य परंपरा मे इन्दौर के प्रसिध्द संगीतज्ञ राम भाऊ तथा विष्णुपंत छ्मे के नाम उल्लेखनीय है। नत्थू खां कि शिष्य परंपरा मे पंडित रामकृष्ण बुआ, राजा भैया पुछवाले, शंकर राव पंडित तथा कृष्णराव शंकर पण्डित के नाम उल्लेखनीय है।

विशेषताए :-

१- ग्वालियर घराने कि पहेली बडी विशेषता है घनत्वपूर्ण तथा स्पष्ट स्वरो के साथ गायन का प्रदर्शन करना।

२- इस घराने कि ख्याल गायकी मे धृपद अंग का अधिक प्रयोग होता है। क्योकी इस घराने का सूत्रपात सन्धी-काल मे हूआ था।

३- इस घराने मे गमक के प्रयोग पर विशेष बल दिया जाता है। आलाप करते समय गायक लोग मींड आदी का प्रदर्शन करते है।

४- इस घराने मे एक विशेष प्रकार के आलाप का प्रयोग किया जाता है।

५- इसमे लयकारीयो को विशेष महत्व दिया जाता है। दुगून, तीगुन, चौगुन, आड-कुआड, आदी विभिन्न लयकारीयो के प्रयोग से गायन मे चमत्कार उत्पन्न करना इस घराने कि निजी विशेषता है।

६- इसमे सपाट तानो का विशेष प्रयोग होता है।

७- इसमे गायकी तयारी पर अधिक बल दिया जाता है।

८- इस घराने मे तराने कि तैयारी पर विशेष बल दिया जाता है।    

 

 

 


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